EMI Rule : देश में लाखों लोग किसी ना किसी वजह से बैंक से लोन लेते हैं—कभी घर खरीदने के लिए, कभी गाड़ी लेने के लिए, तो कभी व्यापार शुरू करने के लिए। जब सबकुछ सही चलता है, तो EMI भी समय पर जाती है, लेकिन अगर किसी वजह से आमदनी रुक जाए या नौकरी चली जाए तो EMI चुकाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कई बार बैंक वाले कर्जदार को बार-बार कॉल कर परेशान करने लगते हैं। लेकिन अब RBI ने साफ कर दिया है कि कोई भी बैंक या रिकवरी एजेंसी लोन न चुका पाने वाले व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं कर सकती।
यह खबर उन लोगों के लिए राहत की सांस है जो समय पर लोन चुकाना चाहते हैं लेकिन हालात के चलते ऐसा नहीं कर पा रहे। RBI की ये गाइडलाइन बैंक और रिकवरी एजेंट्स दोनों पर लागू होती है, और इसके उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान भी है।
RBI ने क्या कहा है अपनी गाइडलाइन में
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकों और फाइनेंशियल कंपनियों को साफ निर्देश दिए हैं कि वो किसी भी लोन डिफॉल्टर से वसूली करते वक्त इंसानियत और गरिमा का ध्यान रखें। RBI के अनुसार, रिकवरी एजेंट किसी भी ग्राहक को डराने, धमकाने या बार-बार फोन करके परेशान नहीं कर सकते।
RBI ने यह भी साफ किया है कि कॉल करने का भी एक तय समय है। सुबह 8 बजे से पहले और रात 7 बजे के बाद कोई भी बैंक कर्मचारी या एजेंट ग्राहक से बात नहीं कर सकता। अगर कोई ऐसा करता है तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है। यह नियम सभी बैंकों, NBFCs और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों पर लागू होता है।
बैंक की वसूली प्रक्रिया में अब होगी पारदर्शिता
अक्सर देखने को मिलता है कि बैंक रिकवरी एजेंट को भेजते हैं और वह सीधे घर या दफ्तर जाकर कर्जदार को सार्वजनिक रूप से अपमानित करता है। लेकिन RBI की नई गाइडलाइन में यह बिल्कुल मना किया गया है।
अब बैंक को पहले ग्राहक को लिखित नोटिस या कॉल के ज़रिये सूचित करना होगा। अगर ग्राहक फिर भी संपर्क में नहीं आता, तो ही रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। यहां तक कि एजेंट को भी ग्राहक से बात करते समय उसका रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा, ताकि बाद में कोई विवाद न हो।
अगर बैंक की टीम परेशान करे तो कहां करें शिकायत
अगर किसी कर्जदार को लगता है कि बैंक या उसकी तरफ से कोई रिकवरी एजेंट उसे बार-बार कॉल करके, धमका कर या फिर घर आकर परेशान कर रहा है, तो वो सीधे RBI की वेबसाइट पर “Consumer Complaint” सेक्शन में जाकर शिकायत दर्ज कर सकता है।
इसके अलावा ग्राहक बैंक के ग्रेविएंस सेल में भी शिकायत कर सकता है। यदि बैंक 30 दिन में जवाब नहीं देता, तो ग्राहक बैंकिंग लोकपाल (Ombudsman) के पास भी जा सकता है। इन सबके लिए अब ऑनलाइन प्रक्रिया उपलब्ध है जिससे आम आदमी को कहीं भागदौड़ करने की जरूरत नहीं है।
क्या वाकई में नहीं ले सकते बैंक कोई कड़ा कदम?
यह बात सही है कि अगर आप लगातार EMI नहीं भरते हैं तो बैंक को भी नुकसान होता है और वह अपनी राशि वसूलने के लिए कदम उठाते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वो आपको धमका सकते हैं या मानसिक रूप से प्रताड़ित करें।
RBI का मकसद ये नहीं है कि बैंक अपने पैसे ना वसूलें, बल्कि तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे कर्जदार की गरिमा बनी रहे। अगर ग्राहक वाकई में परेशानी में है और ईमानदारी से अपनी स्थिति बता रहा है, तो बैंक को चाहिए कि वह रिपेमेंट प्लान में बदलाव करें या थोड़ी मोहलत दें।
बैंकों को भी रखनी होगी संवेदनशीलता
आज के समय में, जब हर चीज़ डिजिटल हो गई है, तब बैंकों की भूमिका भी सिर्फ पैसा देने की नहीं रह गई। उन्हें अब ग्राहक की स्थिति समझनी होगी। कई बार ऐसा होता है कि ग्राहक खुद से संपर्क करता है लेकिन बैंक की तरफ से कोई समाधान नहीं मिलता।
इसलिए RBI ने साफ कर दिया है कि बैंक को सिर्फ ब्याज वसूलने की मशीन ना बनाएं। ग्राहक के साथ व्यवहार करते समय संवेदनशीलता दिखाएं, क्योंकि हर कोई जान-बूझकर डिफॉल्ट नहीं करता। कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि इंसान मजबूर हो जाता है।
👉 अगर आप या आपके किसी जानने वाले को बैंक या एजेंट परेशान कर रहे हैं, तो यह जानकारी जरूर शेयर करें। कानून आपके साथ है।